कड़ी मेहनत अथक परिश्रम के बावजूद छात्रों को क्यूं बेरोजगारी का है भय ?

भारत की जनसंख्या दिन-दुगुनी रात-चौगुनी हो रही है और रोजगारी आधी और छात्रो का भविष्य बरबादी की ओर जा रही है।बहुत ही भयावह दृश्य का वो मंजर होगा जब हर वो शिक्षित वर्ग में तनातनी और बेरोजगारों के हाथ में खंजर होगा।सवाल ये नहीं कि बेरोगारी का आलम है सवाल ये उठता है कि उसको मिटाने के लिए क्या प्रयास किए गये हैं? और अगर प्रयास करने भर से रोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान हो जाता तो आज भी स्नातक तथा स्नतकोतर करके भी चेहरे पे शिकन क्यूं है।हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की तरफ हर वर्ग उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है,उनकी आँखो में सवाल है वो पूछना चाहते हैं कि आप के वादों में यकिन करके हमने अपने पाँच साल दे दिए हैं अब तो है आपकी सरकार फिर भी है युवाओं में नौकरी की दरकार।आखिरी साल है आपके वादों का भी और आपके मतदाताओं के सब्र का भी।अच्छी सरकार का फैसला इस बात से होता है कि हर वर्ग किस कद्र संतुष्ट है।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *